हमे तो लोगो ने भूलना शुरु कर दिया । ना जाने हमने कौन सा गुनाह कर दिया।। हमे तो लोगो ने भूलना शुरु कर दिया । ना जाने हमने कौन सा गुनाह कर दिया।।
बुने किस्मत ने जो जाले,उन्हीं जालों में उलझा हूँ कहूँ अब किस तरह तेरे, ख्यालों में ही उलझा हूँ कभी ख... बुने किस्मत ने जो जाले,उन्हीं जालों में उलझा हूँ कहूँ अब किस तरह तेरे, ख्यालों म...
इश्क़ दर्द और मेरी शायरी ''कवि अपर्णेय'' इश्क़ दर्द और मेरी शायरी ''कवि अपर्णेय''
जरूर तुमसे मेरा कोई रूह का ही रिश्ता है शायद ! जरूर तुमसे मेरा कोई रूह का ही रिश्ता है शायद !